माता-पिता एवं अभिभावक बैठक से बालिका शिक्षा को मिला नया संबल
राजस्थान समग्र कल्याण संस्थान (RSKS इंडिया) द्वारा संचालित पाठशाला में बालिकाओं की शिक्षा और समग्र विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से माता-पिता एवं अभिभावकों के साथ पेरेंट्स-टीचर मीटिंग (PTM) का आयोजन किया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं की शैक्षणिक प्रगति, नियमित उपस्थिति, व्यवहार, रुचियों और भविष्य की योजनाओं के संबंध में अभिभावकों के साथ संवाद स्थापित करना था। इस अवसर पर माता-पिता और अभिभावकों का स्वागत करते हुए उन्हें बालिकाओं की शिक्षा में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। बैठक में अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी बात साझा की।
PTM के दौरान अभिभावकों से बालिकाओं की शिक्षा और घर पर उनके अध्ययन से जुड़े विभिन्न विषयों पर सवाल-जवाब किए गए। उनसे पूछा गया कि बालिकाएं नियमित रूप से पढ़ाई करती हैं या नहीं, उन्हें पढ़ाई के लिए घर पर पर्याप्त समय और सहयोग मिलता है या नहीं तथा उनकी पढ़ाई में परिवार किस प्रकार मदद करता है। इसके साथ ही बालिकाओं की रुचि, पसंदीदा विषय, स्कूल में उपस्थिति और भविष्य में वे क्या बनना चाहती हैं, जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई। इस संवाद से अभिभावकों को अपनी बेटियों की शैक्षणिक जरूरतों को समझने का अवसर मिला।
बैठक में बालिका शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, स्वच्छता, अनुशासन, आत्मविश्वास, जीवन कौशल और सुरक्षित वातावरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। अभिभावकों को समझाया गया कि केवल बालिका का विद्यालय जाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके अध्ययन के लिए घर में सकारात्मक माहौल बनाना भी जरूरी है। माता-पिता का प्रोत्साहन बालिकाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। अभिभावकों ने भी बालिकाओं की शिक्षा को निरंतर जारी रखने और उन्हें आवश्यक सहयोग देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
RSKS इंडिया की पाठशाला में आयोजित यह PTM विद्यालय और परिवार के बीच मजबूत संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही। इस बैठक ने यह संदेश दिया कि बालिका की शिक्षा की सफलता में शिक्षक, अभिभावक और समुदाय—तीनों की समान भूमिका होती है। नियमित संवाद और सामूहिक प्रयासों से बालिकाओं को बेहतर शैक्षणिक अवसर, आत्मनिर्भरता और उज्ज्वल भविष्य की ओर आगे बढ़ाया जा सकता है। ऐसी बैठकें अभिभावकों को जागरूक करने के साथ-साथ बालिकाओं के शिक्षा अधिकार और उनके सर्वांगीण विकास को मजबूत आधार प्रदान करती हैं।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें