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“आत्मनिर्भरता की नई पहचान : महिला SHG और पशुपालन”

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  ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में RSKS india द्वारा स्वयं सहायता समूह ( SHG ) की महिलाओं के साथ लगातार कार्य किया जा रहा है। संस्था के सहयोग और मार्गदर्शन से आज कई महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होकर स्वयं का रोजगार संचालित कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन महिलाओं के लिए आय का सबसे बड़ा और स्थायी व्यवसाय बनकर उभरा है। महिलाएं गाय, भैंस, बकरी एवं अन्य पशुओं का पालन कर दूध उत्पादन और डेयरी व्यवसाय से नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ आत्मविश्वास और सामाजिक पहचान में भी वृद्धि हो रही है। RSKS इंडिया द्वारा महिलाओं को पशुपालन से संबंधित प्रशिक्षण, जागरूकता और आवश्यक सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे आधुनिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद महिलाओं में बचत की आदत विकसित हुई है और वे छोटे-छोटे ऋण लेकर अपने व्यवसाय का विस्तार भी कर रही हैं। पहले जो महिलाएं केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, आज वे आर्थिक निर्णयों में भ...

वित्तीय जागरूकता से सशक्त बनती महिलाएं

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  राजस्थान समग्र कल्याण संस्थान द्वारा ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महिला स्वयं सहायता समूह ( SHG ) के साथ आर्थिक सशक्तिकरण  कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना, उन्हें बचत और ऋण जैसी सुविधाओं के प्रति जागरूक करना और उनके आर्थिक अधिकारों के प्रति सजग बनाना था। कार्यक्रम में महिलाओं को बैंक खाते खोलने, डिजिटल बैंकिंग, लोन प्रक्रिया और बचत योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने महिलाओं को बताया कि कैसे वे अपने समूह के माध्यम से संयुक्त रूप से ऋण ले सकती हैं और छोटे व्यवसाय या कृषि गतिविधियों में निवेश कर अपनी आय बढ़ा सकती हैं। महिलाओं ने सक्रिय रूप से प्रश्न पूछे और अपने अनुभव साझा किए, जिससे कार्यक्रम और भी प्रभावी बना। इस पहल से न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा, बल्कि उन्हें अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भागीदारी करने का अवसर भी मिला। ग्रामीण महिलाएं अब बैंकिंग सेवाओं के माध्यम से अपने व्यवसाय और घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में सक्षम हो सकेंगी। राजस्...

बैंक लिंकज प्रोग्राम: ग्रामीण महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण की दिशा में एक कदम

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  RSKS इंडिया द्वारा ग्रामीण महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (SHG) के सदस्यों के लिए बैंक लिंकज प्रोग्राम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को वित्तीय क्षेत्र से जोड़ना और उन्हें अपने आर्थिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली, बचत खाते, क्रेडिट सुविधाएँ और लोन प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी गई। इसके माध्यम से महिलाओं को यह समझने में मदद मिली कि कैसे वे अपनी कमाई को सुरक्षित रख सकती हैं और भविष्य की योजनाओं के लिए निवेश कर सकती हैं। कार्यक्रम के दौरान, बैंक अधिकारियों और वित्तीय विशेषज्ञों ने महिलाओं को बैंक खाते खोलने, डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं का उपयोग करने और सही वित्तीय निर्णय लेने की तकनीक सिखाई। महिलाओं ने स्वयं अपनी वित्तीय योजनाओं के बारे में चर्चा की और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस प्रोग्राम ने महिलाओं में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास पैदा किया, जिससे वे अपने परिवार और समुदाय में वित्तीय निर्णयों में सक्रिय भागीदारी कर सकें। RSKS इंडिया ने यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक महिला को व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिल...

ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना- आशा और आत्मनिर्भरता का मार्ग

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मेरा नाम सुनीता है मैं एक बहुत गरीब और विधवा महिला हूँ मेरे 1 बेटा है जो बहुत छोटा है पहले तो जैसे तैसे मैं अपना गुजारा कर लेती थी परन्तु बच्चे की शिक्षा, घर खर्च की वृद्धि को देखते हुए मेरा कार्य करना बहुत जरुरी था ! लेकिन मुझे कोई राह , दिशा , जानकारी प्राप्त न होने के कारण दिल में डर का भाव बना रहता था ! फिर पड़ोस की महिला के द्वारा मुझे स्वयं सहायता समूह के बारे में पता चला ! जिसमे सभी महिलायें मिलकर एक समूह गठित करती है और अपनी छोटी छोटी बचतों से एक दूसरे की मदद करती है यह बात जानकार मैंने एक समूह में अपना नाम लिखवा लिया और अपनी समूह के बचत के माध्यम से अपनी छोटी मोटी जरूरतों को इसी से पूरा करने लगी ! परन्तु मैं स्वयं का अपना कोई रोजगार डालना चाहती थी ! फिर हमारे समूह को 1 वर्ष पश्चायत बैंक से ऋण प्राप्त हुआ और फिर मैंने अपने कृषि  कार्य को प्रारंभ किया ! धीरे धीरे मैंने इस कार्य से प्राप्त राशि को बैंक किश्त रूप में अपने ऋण में चुकौती करवाई ! अपने इस कार्य को करने में पूर्ण स्वतंत्र हो गई ! स्वयं सहायता समूह महिलाओ को वो मंच प्रदान करता है जहां पर उसे अपने विचार अभिव्यक्त...

महिलाओं का उद्यम: सफलता की नई परिभाषा

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मेरा नाम मंजू नायक है मैं एक ग्रामीण महिला हूँ और कक्षा 5वी तक पढ़ी हूँ ! मेरे परिवार में मेरे 2 बच्चे व् पति हम सब साथ रहते है शादी के बाद से मेरे घर की आर्थिक स्थितियां ठीक नहीं रहती थी ! पति फुटकर मजदूरी करते है ऐसे में बच्चों को पढ़ना, घर खर्च चलाना बहुत मुश्किल हो जाता है ! घर की जरूरतों का जैसे एक पहाड़ सा खड़ा हो गया जिसे पार करना बेह्द कठिन सा लगता है ! फिर मैंने समूह मे अपना नाम लिखवाकर मासिक बचत करने लगी ! धीरे धीरे ये बचतें बढ़ने लगी और समूह आपस में पारस्परिक ऋण प्रदान करने लगे ! जिनको मैं समय समय पर अपनी  आवस्यकतानुसार प्राप्त कर अपनी जरूरतों को पूरा कर सकने में सक्षम हो गई ! परन्तु अभी मुझे अपने पैरो पर खड़ा होना था ! उसके बाद हमारे समूह को बैंक से ऋण प्राप्त हुआ ! जिसको मैंने भी लिया और गांव में ही सब्जी की दुकान का कार्य प्रारम्भ किया ! शुरू शुरू मैं कुछ परेशानियों के बाद यह व्यवसाय रफ़्तार पकड़ने लगा ! पहले तो गांव में पास के लोग ही सब्जियाँ लिया करते थे पर अब पूरा गांव व् आस पास के गांव भी आकर मुझसे ही सब्जी प्राप्त करने लगे ! इस काम में मेरे पति भी मेरा सहयोग करते थ...